कन्या राशी : ज्योतिष की नजर से ( Kanya Rashi - virgo )





कन्या राशी : ज्योतिष की नजर से 

राशी चक्र में इस राशी का क्रमांक छठा हे . यह राशि स्त्री संज्ञक , पांडूवर्ण , द्विस्वभाव , दक्षिण दिशा की स्वामी , वायु प्रधान ,शीत स्वाभाव , रात्री बलि ,समोदायी , भुचारी , शुभ मुनि पर विवरण करने वाली , वैश्यवर्ण , कांति रहित , एवं सौभ्य राशि हे . राशी का स्वामी बुध श्रेष्ठ शरीरी , वक्ता , हंश्मुख , पित , कफ. वायु प्रकृति वाला ले . इसका स्वामी बुध हे तथा ये अस्थिर स्वामी का मालिक हे .

इस राशी वाले जातको का शरीर पतला , कद लम्बा होता हे . परन्तु कई जातक छोटे कद के भी होते हे . इनके बाल धने होते हे . आँखे छोटी और दिख एवं दृष्टि तेज होती हे . इनका रन साफ़ , गेहुआ होता हे तथा ये जलदी जल्दी चलते हे . इनका शरीर चिकना व कोमल होता हे . ये बड़े चुस्त होते हे तथा सही आयु से उनकी आयु कम ही लगती हे . ये बड़े फुर्तीले और सूझवान होते हे . 

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कन्या राशी वाले जातक न्यायप्रिय , दयालु होते हे और प्रत्येक कार्य को बहुत ठन्डे दिमाग से सोचकर करते हे . ये बुद्धिमान , विचारशील, चिन्तक ,विवेकशील ,ज्ञानी - ध्यानी तथा सूझवान होते हे . ये उल्जनो एवं समस्याओं की गुथी सुल्जाने में बड़े माहिर होते हे . इनका स्वभाव  परिवर्तनशील होने के कारण कई बार इनके परिवारजन इनसे नाराज हो जाते हे . ये बहुत चतुर होते हे और तुरंत अवसर संभाल लेते हे . इनमे सर्वगुण होते हे लेकिन स्वार्थ एवं भोग की प्रकृति के कारण ये अधिक मान सम्मान , प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर पाते हे . 

ये विपतियो में  बुद्धि से काम लेते हे और सफलता पाते हे . इनका व्यक्तितत्व रहस्मय होता हे . ये जीवन को व्यावहारिकता से जीना चाहते हे . ये सांसारिक एवं सामाजिक कार्यो में अधिक रूचि लेते हे . कन्या राशी वालो को केसी भी चिंता हो लेकिन इनके चेहरे पर हर समय मधुर मुस्कान देखने को मिलेगी . ये परेशानी अन्दर रखते हे और दुसरो को अनुभव नहीं होते देते . 

इस राशी की स्त्रीया  उदार , परिश्रमी, चतुर सर्व एवं , धार्मिक होती हे . ये शंकालु एवं अविशवाशी प्रवुती के कारण चिंता में रहती हे . ये व्यवहार कुशल होती हे और अच्छी पत्नी व् माता बनती हे . उर्तार्ध जीवन में अपने विद्या - बुद्धि समजदारी से निजी परिस्थियों को अनुकूल बनाने में समर्थ होती हे . 

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आर्थिक स्थिति एवं व्यवसाय : 

कन्या राशी के जातको की आर्थिक स्थिति परिवर्तन शील होती हे . इन्हें जीवन में संघर्ष करना पड़ता हे . जीवन में अधिक परिश्रम करने से ही सफलता मिलती हे . कन्या पृथ्वी तत्त्व राशी हे . इसलिए इन जातको का ध्यान धनोर्पाजन की और अधिक रहता हे . ये अपनी बुद्धि बल द्वारा अधिक धन प्राप्त करते हे .

ये व्यापार , सरकारी सेवा , चित्रकला ,काव्यकला , बागबानी,  केमिस्ट , जनरल मेडिसिन , स्वास्थ्य व् खुराक विभाग , कलर्क , लेखा निरीक्षक , स्टेनो ,संपादक प्रकाशक ,छापखाना , ब्रोकर , अनुवादक , वकील , सलाहकार , पत्रकार , स्टेशनरी ,पुस्तके , घडिया , कर्मचारी , दलाल , अध्यापक , इसमें सफल होते हे . 

भाग्य खुय्लने के वर्ष :

 कन्या लग्न राशी के जातक का भाग्य खुलने का विशेष वर्ष ३२ वे एवं ३४ वर्ष होता हे . प्राय : १८ से २६ वर्ष के भीतर विवाह का योग होता हे .२० से ३५ वर्ष तक कठोर परिश्रम और प्रयत्न से भाग्य निर्माण का समय होता हे . 

शुभ रत्न : कन्या राशी का शुभ रत्न पन्ना तथा धातु सोना हे , अत: भाग्योंन्ति के लिए पन्ना सवा पांच रति चांदी या सोने की अंगूठी में बुधवार दाहिने हाथ की कनिष्ठ या अनामिका में धारण करे . 

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राशिफल २०२१ .  




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1 टिप्पणियाँ

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